قبل كل شيء أعتذر على حذف بعض المقالات من حسابي..  ندمت على ذلك.. 

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"أحياناً تكون الوحوش أحن علينا من البشر.." كنت أردد هذه العبارة كثيراً..  لم أتوقع حصولها في حياتي..  

أنا ولد صغير ليس لدي أم..  أعيش مع أبي..  إنه قاس بعض الشيء وجاد..  أعيش في كوخ في الغابة..  أحب شجرة البلوط كثيراً..  

لا أذهب إلى المدرسة..  فنحن منعزلون عن العالم..  أتمنى الحصول على أصدقاء..  

أذهب نحو شجرة البلوط وأترقب الأفق.. 

مرة كنت مستيقظا أثناء الليل..  ثم أغمضت عيناي قليلاً..  أحسست بيد لطيفة مسحت ظهري..  استدرت فلم أر أحداً.. 

تكرر هذا ثلاث ليال.. 

الليلة الرابعة.. 

عدت إلى غرفتي لأنام..  فإذا بي أرى وحشا عملاقاً في الغرفة..  خفت كثيراً.. 

اقترب مني ووضع خيشومه الكبير فوق صدري..  كان قلبي ينبض بشدة..  ثم قال لي: خائف ؟ 

كان صوته خشنا جداً لكنه بدا حزينا ومثيرا للشفقة..  

اندهشت وقلت: تتكلم ؟

- نعم.. 

- من أين جئت ؟!

- من عالم التنانين..  تم طردي لأني طيب القلب.. 

- لماذا تأتي إلى غرفتي ؟

- لأنك وحيد مثلي.. 

- كيف عرفت بأني وحيد ؟ 

- كنت أراقبك.. 

ثم ظهر ضوء حول التنين..  اقترب مني كثيراً وقال: أراك الليلة القادمة..  عندي لك مفاجأة.. 

💫 جاءت الليلة المنتظرة..  كنت جالسا فوق السرير..  ثم ظهر الضوء..  وظهر خلفه التنين..  

- اركب فوق ظهري..

- ألن أسقط ؟

- أبدا.. أنت صغير وظهري واسع.. 

ركبت فوقه..  طار بسرعة..  أجنحته العملاقة تنشئ هواءا ثقيلاً وهي تصعد وتنزل..  عندما ترتفع أخالها موجة ستسقط فوقي.. 

دخل التنين بقعة من الضوء تشبه الأسطوانة الطويلة..  إنتهى بي المطاف إلى أرض خضراء جميلة مليئة بالجبال ذات الفوهات العملاقة.. 

أدخلني التنين  إلى أحد الجبال..  وأعطاني جوقة بها نقطة صفراء من الضوء..  

قال لي:

- بقائي معك لن يدوم طويلاً..  عندما تعود إفتح الجوقة واتبع النقطة تصل إلى الصديق الوفي..  

- لكنك صديقي.. 

- ربما..  لا أدري..  جئت لمساعدتك..  وهذا ما جعل التنانين يلاحقونني.. دعنا نخرج بسرعة.. 

وبينما نحن نحلق..  ظهر خلفنا تنين أحمر وآخر أسود مرعب..

قذف بي التنين إلى أسطوانة الضوء..  لأجد نفسي بجانب شجرة البلوط..  بكيت تلك الليلة كثيراً.. 

لم أهتم بالجوقة قدر ما اهتممت بالتنين المسكين.. 

ظهر التنين..  لكنه كان شفافا..  كلماته الأخيرة..  " لا تضيع جهدي هباءً أرجوك..  إن كنت تحبني إفتح الجوقة.. وحافظ على الصديق جيداً..  وداعاً " 

واختفى..  

فتحت الجوقة وهدتني النقطة إلى أبي..  اندهشت حقاً..  كانت تجربة مريرة مررت بها..  لكني تعلمت أن الوالدين هما أفضل الأصدقاء رغم قسوتهم علينا في بعض الأحيان..  وتعلمت أن فاعلي الخير نادرون جداً علينا أن نهتم بهم ونحبهم ونقدر ما يفعلون من أجلنا ولا ننسى صنيعهم مدى الحياة..  وتعلمت كذلك أنه علينا أن لا نحكم على الناس من شكلهم الخارجي..  

🐉 شكراً صديقي العملاق..